बाल अपराध रोकने को वाराणसी समेत 50 जिलों में बनेगा बाल मैत्री स्थल

वाराणसी। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने मंगलवार को कहा कि सरकार बाल मजूदरी, बाल भिक्षावृत्ति एवं बाल हिंसा को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसके लिए बाल मैत्री स्थल का निर्माण कराया जाएगा। प्रथम चरण में यह काम देश के 50 जिलों में होगा। इसमें वाराणसी भी शामिल है।

एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि इस कार्य के लिए ऐसे जिलों को चिह्नित किया गया है, जहां धार्मिक पर्यटन स्थल सबसे अधिक है और वहां ज्यादा से ज्यादा पर्यटक आते हैं। वाराणसी भी चयनित उन जिलों में से एक है, जहां बाल अधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए एक अभियान शुरू किया जाएगा।

इस अभियान में बाल श्रम, बाल हिंसा, दुर्व्यवहार और बाल भिक्षावृत्ति को रोकते हुए बाल मैत्री स्थान का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रामनगर स्थित राजकीय बाल गृह एवं संप्रेक्षण गृह कानून की मंशा के अनुरूप कार्य कर रही है और एक मॉडल के रूप में अन्य जनपद को लागू करना चाहिए।

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बाल संरक्षण और रोकथाम के दृष्टिकोण के बारे में वाराणसी कि स्थिति और चल रहे प्रयासों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जिले में महिला कल्याण विभाग, अन्य विभाग और समितियों के साथ संयुक्त रूप से कार्य कर रही है। उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष विशेष गुप्ता ने वाराणसी जिले की तरफ से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य स्तर से यूनिसेफ का तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है।
ये रहे उपस्थित

इस वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य सचिव रूपाली बनर्जी सिंह, तकनीकी सलाहकार प्रवेश कुमार, काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उपनिदेशक महिला कल्याण से प्रवीण कुमार त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक एवं विशेष किशोर पुलिस इकाई के नोडल अधिकारी अनुराग दर्शन, सहायक श्रमायुक्त देवव्रत यादव, बाल संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह, वाराणसी मण्डल में यूनिसेफ समर्थित कार्यक्रम के मंडलीय सलाहकार-बाल संरक्षण प्रीतेश कुमार तिवारी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मनोज मिश्रा, थानों में नामित समस्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, मानव तस्करी रोधी इकाई, जिले के विभिन्न बाल देखरेख संस्थानों के प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि, शिक्षा विभाग अधिकारी, नगर निगम के अधिकारी, विभिन्न धर्मगुरु एवं समूह के प्रतिनिधि, चाइल्डलाइन के नोडल अधिकारी आदि मौजूद रहे।