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बंगाल: केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती पर निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया रुख

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल राज्य में विशेष रूप से केन्‍द्रीय पुलिस बल के जवानों को भेजे जाने पर सोमवार को भारत निर्वाचन आयोग ने अपना रुख स्पष्ट किया है. बकौल आयोग, 1980 के दशक से केन्‍द्रीय पुलिस बलों को नियमित रूप से अग्रिम क्षेत्रीय अधिकार के लिए लोकसभा/विधानसभा वाले राज्‍यों में भेजा जाता है.

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर केन्‍द्रीय पुलिस बल के जवानों को भेजा गया है. यह खबर चर्चित अंगेजी अखबारों में प्रकाशित हुई थी. इस मामले को संज्ञान लेते हुए भारत निर्वाचन आयोग अपना रुख स्पष्ट किया है.

भारत निर्वाचन आयोग ने बताया कि केन्‍द्रीय पुलिस बलों को नियमित रूप से अग्रिम क्षेत्रीय अधिकार के लिए लोकसभा/विधानसभा वाले राज्‍यों में भेजा जाता है, विशेषकर उन गंभीर और नाजुक क्षेत्रों में जिन्‍हें सावधानीपूर्वक की गई, अग्रिम समीक्षा में चिन्हित किया जाता है, जिनके बारे में राजनीतिक दलों और अन्‍य इकाईयों सहित विभिन्‍न स्रोतों से पुख्‍ता फीडबैक प्राप्‍त होता है। यह परिपाटी 1980 के दशक से जारी है।

विदित हो कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 12 कंपनियां चुनाव तैयारियों के तहत पश्चिम बंगाल पहुंची। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए अप्रैल-मई में चुनाव होने की संभावना है। शनिवार को केंद्रीय बलों की 12 कंपनियां बंगाल पहुंच गईं और कई जिलों में रूट मार्च भी शुरू कर दिया है. चुनाव आयोग की ओर से 25 फरवरी तक बंगाल में केंद्रीय सुरक्षा बलों की 125 कंपनियों को तैनात करने का फैसला लिया गया है।

बकौल, निर्वाचन आयोग साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सभी राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों में केन्‍द्रीय बल भेजे गए थे। इसी तरह केन्‍द्रीय बल उन सभी राज्‍यों में भेजे जा रहे हैं जहां चुनाव होने है। वर्तमान मामले में केन्‍द्रीय पुलिस बल सभी चार राज्‍यों-असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केन्‍द्र शासित प्रदेश पुद्दुचेरी में भेजे गए हैं। इन राज्‍यों में चुनाव होने वाले हैं।
जन संदेश टाइम्स/पवन कुमार मौर्य