Mars-mission-by-NASA

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मंगल ग्रह की सतह पर उतरा नासा का रोवर, रहस्य होंगे उजागर


वाशिंगटन: अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने शुक्रवार को मंगल ग्रह पर जेजेरो क्रेटर में अपना पर्सिवरेंस रोवर उतार दिया है. इसी के साथ अमेरिका मंगल ग्रह पर सबसे ज्यादा रोवर भेजने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है. इस रोवर का उद्देश्य मंगल ग्रह के प्राचीन जीवन का पता लगाना और मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर लाना है.

गौरतलब है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनेस्ट्रेशन (NASA ) द्वारा भेजा गया, मार्स पर्सिवरेंस रोवर शुक्रवार को मंगल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक लैंड कर लिया. पर्सिवरेंस रोवर ने सात महीने पहले इस यात्रा के लिए धरती से टेकऑफ किया था. गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात भारतीय समय के अनुसार दो बजकर 25 मिनट के करीब पर्सिवरेंस रोवर ने मंगल की सतह को स्पर्श किया.

रोवर के लाल ग्रह की सतह पर पहुंचने के तुरंत बाद नासा ने वह पहली तस्वीर भी जारी कर दी, जिसे मंगल ग्रह के रहस्यों के उद्घाटन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि कहा जा रहा है.

जेजेरो क्रेटर (Jezero Crater) मंगल ग्रह का अत्यंत दुर्गम इलाका है. जेजेरो क्रेटर में गहरी घाटियां, तीखे पहाड़, नुकीले क्लिफ, रेत के टीले और पत्थरों का उबड़-खाबड़ जमाव है.

पर्सिवरेंस मार्स रोवर की विशेषता :
अमेरिकी पर्सिवरेंस मार्स रोवर की ख़ास बात यह है कि यह दुनिया का पहला रोवर है, जो परमाणु ऊर्जा से मंगल ग्रह की सतह पर चलेगा. पर्सिवरेंस मार्स रोवर 1000 किलोग्राम वजनी है. साथ ही पहली बार किसी रोवर में प्लूटोनियम को ईंधन के तौर पर उपयोग किया जा रहा है. यह रोवर मंगल ग्रह पर 10 साल तक काम करेगा. रोवर ने मंगल ग्रह की सतह पर उतरते ही तस्वीर भेजनी शुरू कर दी.